Tuesday, December 7, 2010

अंदाज़े से
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आधी ज़िन्दगी बीत गयी,
इसका जवाब ढूढने में,
कि ये "अंदाजा" क्या होता है |

रोज़ माँ से पूछती थी, "ये मसाला कितना डाला",
तो वो बोलती थी बस "अंदाज़े से" |

मैं पूछती रहती, "एक चमच या दो",
वो कहती, "बस बेटा अंदाज़े से" |

सोच सोच के मेरा दिमाग परेशान हो जाता,
ये समझ नहीं आता कि
"अंदाज़े से" होता कितना है... |

हमेशा उस दिन से डरती थी,
जिस दिन पहली बार किसी के लिए कुछ बनाउंगी
और वो भी बिना माँ के भाषण के |

लो जी वो दिन भी आ गया...

खाना बनाया और सारे मसाले भी डाले,
कुछ आधा चमच और कुछ पूरा चमच |

देखते ही देखते खाना तैयार हो गया
और फिर माँ से यु ही बात हुयी...
हाल चाल से पहले उनहोंने एक सवाल पुछा,
"खाना कैसा बना?"
मेरा जवाब था, "अच्छा लगा सबको" |
उनका अगला सवाल था, "मसाले कितने डाले"
और हस्ते हुए कहा मैंने ... "अंदाज़े से" ... || :-)








Sunday, August 22, 2010

शायद
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तुझे हासिल करने का जूनून नहीं था दिल में,
बस प्यार करने की तमन्ना थी ...
... शायद इसलिए पा न सके तुझे हम,
और बस प्यार की ज्योत जलाते रहे ...

ख़ुशी देना मुमकिन न था,
बस तुझे खुश देखना चाहते थे ...
... शायद इसलिए तू गेरो में खुश रहा,
और हम तेरी ख़ुशी की दुआ ही मांगते रहे ...

Tuesday, August 17, 2010

रात
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ये रात बड़ी बईमान है,
पर तुम पे सबसे ज्यादा मेहरबान है ...
तुम्हे हर रात खूबसूरत बनाती है,
और मुझे तुम्हारी याद में तड़पाती है ...
यह तो शुक्र है हर रात में चाँद  नज़र आ जाता है,
और मुझे तुम्हारी झलक उसमें दिखला जाता है ...
शायद इसलिए अमावस्या की रात के बाद,
तुझे उस चाँद में ढूँढने में अलग ही मज़ा आता है ...

Sunday, August 15, 2010

मिसाल

साफ़ सीधी सी बात है,
आज मेरा मन उदास है...

जिसे कहती है दुनिया दोस्त
वो तो मेरे पास है...
पर उसकी परेशानी देख के,
आज दिल में बस इक बात है | 

बहुत अरसे बाद आज,
किसिके दुःख से फिर मन टूटा है,
ऐसा लगता है ...
... रब्ब मुझसे ज्यादा शायद तुझसे रूठा है,  
तुने जो दर्द सहने में यह महारथ हासिल की है,
उसी रब्ब की कसम मैंने हर मोड़ पे...
तुझसे ही हिम्मत की मिसाल ली है ||